Sunday, August 10, 2008

तुमसे सीखना चाहता हूँ ?


मैं जिंदगी को गुनगुनाना चाहता हूँ तुम्हारी तरह /

तुम पिता से दूर रह कर भी उनको चिठ्ठी लिखते हो/

माँ से बात भी करते हो और अपनी बेटी को पार्क में झुलाते हो /

तुम अपनी पत्नी को किसी राजकुमारी से भी ज्यादा प्यार देते हो /

तुम अपने दोस्तों के लिए भी हर दिन जीना चाहते हो /

तुम बड़े आदमी नही हो फिर भी मैंने तुम्हे हँसते हुए अक्सर आइसक्रीम खाते देखा है /

तुम ड्यूटी टाइम पर जाते हो और ठीक शाम को घर पर होते हो /

इस छोटे से मकान में तुम राजा की तरह रहना जानते हो /

तुम्हे रामदेव भी सुहाता है और इमरान हाशमी भी /

मुझे लगता है की तुम जीना जानते हो / तुलना से दूर तुम अपने अलग संसार में खुश हो /

तुम मुझे अच्छे लगते हो और मैं तुमसे सीखना चाहता हूँ की तुमने ये सब कैसे सीखा? जब धर्मगुरु भी मनी-मनी कर रहे है तुम्हारे पास हनी है ?

तुम मेरी कल्पना के अखिलेश हो जिसे मैं सुबह- शाम जीने की कोशिश में जुटा हूँ .....

तुम आम कवि की तरह आदर्शवादी नही लेकिन यथार्थवादी लगते हो ....

तुम अनुज , अमित , शेखर या संदीप या सुमित जैसे अपने दोस्तों में छुपते नही और मैं वोहि सूरज बन जाना चाहता हूँ /

फिर चाहे मौसम कैसा भी हो ?

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